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पूर्वी चंपारण CHC में बड़ी लापरवाही, लाखों की ऑक्सीजन पाइपलाइन बंद, मरीज का इलाज एम्बुलेंस में

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पूर्वी चंपारण के पताही CHC में लाखों की ऑक्सीजन पाइपलाइन चालू नहीं होने से मरीज का इलाज वार्ड की बजाय एम्बुलेंस में करना पड़ा। घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूर्वी चंपारण/आलम की खबर:बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। इस बार मामला पूर्वी चंपारण जिले के पताही प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) का है, जहां लाखों रुपये की लागत से लगाई गई ऑक्सीजन पाइपलाइन व्यवस्था सिर्फ कागजों और दीवारों तक ही सीमित रह गई है। जमीनी हकीकत यह है कि गंभीर मरीजों को वार्ड में ऑक्सीजन देने के बजाय एम्बुलेंस के अंदर इलाज करना पड़ रहा है।

यह मामला उस समय सामने आया जब पताही पूर्वी पंचायत निवासी रामनरेश साह की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सांस लेने में गंभीर दिक्कत होने पर परिजन उन्हें तत्काल इलाज के लिए CHC लेकर पहुंचे। लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद जो स्थिति सामने आई, उसने सभी को हैरान कर दिया।

अस्पताल के वार्डों में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए पाइपलाइन तो बिछाई गई थी, लेकिन उसमें गैस सप्लाई ही चालू नहीं थी। मजबूरी में मरीज को अस्पताल परिसर में खड़ी एम्बुलेंस के अंदर ले जाकर ऑक्सीजन दी गई। यह दृश्य देखकर परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो उठे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधा देने के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर ऑक्सीजन पाइपलाइन सिस्टम लगाया गया था, लेकिन आज तक उसे पूरी तरह चालू नहीं किया गया। दीवारों पर लगी पाइपलाइन सिर्फ दिखावे की चीज बनकर रह गई है।

सूत्रों के अनुसार इस पूरी व्यवस्था में तकनीकी अधूरी तैयारी और लापरवाही साफ दिखाई देती है। पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन मुख्य कनेक्शन, कंट्रोल पैनल, रेगुलेटर और प्रेशर सिस्टम पूरी तरह से सक्रिय नहीं किए गए। इसी वजह से ऑक्सीजन सप्लाई शुरू ही नहीं हो पाई।

अस्पताल के स्टोर में कई ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध होने के बावजूद उनका उपयोग वार्ड में मरीजों के लिए नहीं किया जा सका। यदि सिस्टम सही तरीके से काम करता, तो मरीज को एम्बुलेंस के छोटे सिलेंडर पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना को कागजों पर पूरा दिखाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है। जमीनी स्तर पर व्यवस्था अधूरी है, लेकिन रिकॉर्ड में सब कुछ पूरा दिखाया गया है।

अस्पताल परिसर में एम्बुलेंस के अंदर इलाज होता देख लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। ग्रामीणों ने कहा कि यह केवल एक मरीज की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई को उजागर करता है।

परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ऑक्सीजन पाइपलाइन को पूरी तरह चालू नहीं किया गया और व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में बुनियादी सुविधाओं की यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।

स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी योजना बिना पूर्ण तकनीकी जांच के कैसे शुरू कर दी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सिस्टम में सुरक्षा और तकनीकी मानकों का पालन बेहद जरूरी होता है, लेकिन यहां गंभीर लापरवाही दिखाई देती है।

पताही CHC में यह घटना कोई पहली बार नहीं है, इससे पहले भी कई बार अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। लेकिन इस बार मामला सीधे जीवन रक्षक ऑक्सीजन सिस्टम से जुड़ा होने के कारण गंभीर बन गया है।

ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पूरे ऑक्सीजन पाइपलाइन सिस्टम की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए।

फिलहाल अस्पताल प्रशासन इस मामले पर जांच की बात कह रहा है, लेकिन जमीनी स्थिति अभी भी जस की तस बनी हुई है। मरीजों को अब भी आपात स्थिति में एम्बुलेंस या सिलेंडर के सहारे इलाज करना पड़ रहा है।

यह घटना एक बार फिर बिहार की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने लाती है, जहां योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन उनका सही क्रियान्वयन अक्सर अधूरा रह जाता है।

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